Ayodhya Ram Mandir| मूर्तिकार योगीराज की आंखों की चोट के बाद भी जारी रहा था रामलला की मूर्ति निर्माण

अयोध्या में अपनी भव्य राम मंदिर निर्माण के बीच 22 जनवरी को गर्भ ग्रह में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। इस मूर्ति का निर्माण मूर्तिकार अरुण योगीराज ने किया है। मूर्तिकार अरुण योगीराज ने इस दिव्य और अलौकिक मूर्ति को स्वरूप प्रदान करने के लिए रात दिन एक कर मेहनत की है। उनकी इसी मेहनत का फल है कि अब भव्य राम मंदिर के गर्भ ग्रह में इस मूर्ति को स्थापित किया जाएगा। अरुण योगीराज की परिवार ने बताया की मूर्ति निर्माण के लिए बीते 6 महीनों से वह अयोध्या में ही रह रहे हैं। सिर्फ यही नहीं मूर्ति निर्माण के दौरान उनके साथ एक हादसा भी हो गया लेकिन उन्होंने मूर्ति निर्माण का काम नहीं रुका और इसे निरंतर करते रहे। दरअसल मूर्ति निर्माण के दौरान उनकी आंख पर एक चोट लग गई थी। मगर आंख पर लगी चोट की परवाह न करते हुए और नींद का त्याग करते हुए अरुण ने लगातार इस मूर्ति का दिन रात एक कर निर्माण किया है। यह जानकारी अरुण योगीराज के परिवार ने दी है। कर्नाटक की मैसुरू के मूर्तिकार के परिवार से ताल्लुक रखने वाले अरुण योगीराज द्वारा निर्मित मूर्ति को राम मंदिर में स्थापना के लिए राम मंदिर ट्रस्ट ने चुना है। रामलीला की मूर्ति चुने जाने के बाद योगीराज का परिवार बेहद खुश है। योगीराज की पत्नी विजेयता ने कहा कि वह इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं। उन्होंने एक किस्सा भी साझा किया जिसमें बताया गया कि कैसे मूर्ति बनाते समय योगीराज की आंख में चोट लग गई थी। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, मैं बहुत खुश हूं। हमें यह नेक काम करने का दायित्व सौंपा गया है। विजेयता ने कहा, जब यह कार्य (योगीराज को) दिया गया तो हमें पता चला कि इसके लिए उचित पत्थर मैसूरु के पास उपलब्ध है। अरुण योगीराज की पत्नी के मुताबिक जिस पत्थर से भगवान राम की मूर्ति का निर्माण हुआ है, वो काफी सख्त था। इस मूर्ति के निर्माण के दौरान एक नुकीली परत उनकी आंख में चुभ गई थी। इस नुकीली परत को ऑपरेशन के जरिए निकाला गया था। हालांकि पत्थर चुभने के कारण अरुण योगी राज काफी दर्द और परेशानी में रहे थे मगर निरंतर उन्होंने मूर्ति निर्माण का काम जारी रखा। उनका कार्य इतान अच्छा था जिससे हर कोई प्रभावित हुआ है। अरुण योगीराज की पत्नी ने उनके पति के काम को चुने जाने पर सभी को धन्यवाद दिया है। उन्होंने बताया कि मूर्ति निर्माण के दौरान अरुण कई दिनों तक सोए नहीं थे और राम लला की मूर्ति बनाने में ही तल्लीन थे।  ऐसे भी दिन थे जब हम मुश्किल से बात करते थे और वह परिवार को भी मुश्किल से समय देते थे। अब ट्रस्ट की सूचना से सारी मेहनत की भरपाई हो गई है। योगीराज के भाई सूर्यप्रकाश ने कहा कि यह परिवार के लिए एक यादगार दिन है। उन्होंने कहा, योगीराज ने इतिहास रचा है और वह इसके हकदार थे। यह उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण है जो उन्हें इतनी ऊंचाइयों तक ले गया। सूर्यप्रकाश ने कहा कि योगीराज ने मूर्तिकला की बारीकियां अपने पिता से सीखीं। वह बचपन से इसे लेकर उत्सुक थे। योगीराज की माता सरस्वती ने संवाददाताओं से कहा कि यह बहुत ही हर्ष की बात है कि उनके बेटे द्वारा निर्मित मूर्ति का चयन किया गया है। उन्होंने पीटीआई- से कहा, जब से हमें यह खबर मिली है कि अरुण द्वारा बनाई गई मूर्ति का चयन (स्थापना के लिए) किया गया है, हम बहुत खुश हैं। हमारा पूरा परिवार प्रसन्न है।  मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सोमवार को अयोध्या में घोषणा की थी कि नई मूर्ति में भगवान राम को पांच साल के बच्चे के रूप में खड़ी मुद्रा में दर्शाया गया है और कहा कि इसे 18 जनवरी को गर्भगृह में आसन पर विराजमान किया जाएगा। रामलला की मूर्ति चुने जाने की सूचना जैसे ही बहार आई पड़ोसियों और कुछ नेताओं ने योगीराज के परिवार से मुलाकात की और उनके बेटे की प्रशंसा के रूप में सरस्वती को माला भेंट की। योगीराज ने ही केदारनाथ में स्थापित आदि शंकराचार्य की मूर्ति और दिल्ली में इंडिया गेट के पास स्थापित की गई सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा बनाई है। योगीराज ने रामलला की नई मूर्ति बनाने में आई चुनौतियों के बारे में पीटीआई- से कहा, ‘‘मूर्ति एक बच्चे की बनानी थी, जो दिव्य हो, क्योंकि यह भगवान के अवतार की मूर्ति है। जो भी कोई मूर्ति को देखें उसे दिव्यता का एहसास होना चाहिए।’’ प्रख्यात मूर्तिकार ने कहा, बच्चे जैसे चेहरे के साथ-साथ दिव्य पहलू को ध्यान में रखते हुए मैंने लगभग छह से सात महीने पहले अपना काम शुरू किया था। मूर्ति के चयन से ज्यादा मेरे लिए यह महत्वपूर्ण है कि ये लोगों को पसंद आनी चाहिए। सच्ची खुशी मुझे तब होगी जब लोग इसकी सराहना करेंगे।