बिहार में ‘महापलट’ का इंतजार! नीतीश की NDA में एंट्री पर क्यों जल्दबाजी में नहीं BJP, आरजेडी का क्या है प्लान

पटना/नई दिल्ली : बिहार में अगले कुछ दिन सियासत में बड़े उलटफेर वाले हो सकते हैं। अब तक के संकेत के अनुसार, नीतीश कुमार का महागठबंधन छोड़कर NDA में वापसी और फिर CM बनना लगभग तय दिख रहा है। हालांकि, अंतिम समय में दोनों खेमा बहुत सावधानी से अपने पत्ते फेंक रहा है, जिससे स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। RJD-कांग्रेस की ओर से नीतीश कुमार को मनाने की अंतिम समय में कोशिश कामयाब नहीं रही। लेकिन, RJD आसानी से सरेंडर की मुद्रा में नहीं है और प्लान B पर काम कर रही है। उधर, BJP सैद्धांतिक तौर पर नीतीश कुमार के NDA में वापसी को लेकर तैयार तो दिख रही है लेकिन इसकी औपचारिकता पूरा करने से पहले तमाम पहलुओं पर पूरी तरह आश्वस्त भी होना चाहती है। ऐसे में शनिवार से लेकर रविवार तक पटना में RJD और JDU ने अपने-अपने दलों की अहम मीटिंग बुलाई है।क्यों जल्दबाजी में नहीं है BJP?सूत्रों के अनुसार, NDA में JDU की वापसी को लेकर तो BJP का केंद्रीय नेतृत्व तैयार है लेकिन सरकार गठन में बहुत हड़बड़ी में नहीं है। दरअसल, सरकार गठन से पहले BJP आश्वस्त होना चाहता है कि NDA के पास पर्याप्त नंबर है, क्योंकि JDU के कुछ विधायक RJD के संपर्क में भी बताए जा रहे हैं। BJP का मानना है कि नीतीश कुमार के I.N.D.I.A. गठबंधन से अलग होने से उसे बिहार में सियासी लाभ से अधिक नैरेटिव का लाभ मिला है। BJP के राज्य इकाई के अंदर एक मत है कि नीतीश के आने से वोट पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा और BJP अकेले दम पर अधिक सीट जीत सकती है। एक BJP नेता ने कहा कि जेडीयू को जितनी सीटें देंगे, वे कहीं न कहीं बीजेपी के कोटे से ही जाएंगी।वहीं शनिवार को बिहार में बीजेपी की स्टेट एग्जिक्यूटिव की मीटिंग बुलाई गई है। बीजेपी में सुबह से मीटिंग का दौर जारी रहा। बीजेपी बिहार के इंचार्ज विनोद तावड़े ने बीजेपी नेता अमित शाह को सभी डिवेलपमेंट के बारे में बताया। बिहार बीजेपी को वे नेता जो पहले नीतीश पर निशाना साधते रहते थे, उनके सुर भी अब बदल गए हैं। गुरुवार शाम को ही बीजेपी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी, संगठन मंत्री नागेंद्र सहित सीनियर नेताओं को दिल्ली बुलाया और देर रात तक मीटिंग चलती रही।बीजेपी नेताओं का कहना है कि अगर नीतीश इस बार फिर एनडीए में आते हैं तो बीजेपी इस बार उनकी शर्तें नहीं मानेगी बल्कि इस बार बीजेपी का अपरहैंड होगा। बीजेपी बहुत संभलकर चल रही है। कहा जा रहा है कि 8 से 10 कांग्रेस विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं, ताकि अगर नंबर गेम में कुछ हेरफेर हुई तो बैकअप प्लान तैयार रहे। वहीं बीजेपी सरकार गठन से पहले पहले के सहयोगी, मसलन चिराग पासवान और जीतन मांझी को भी विश्वाम में लेना चाहती है। इन तमाम मुद्दों पर देर शाम बीजेपी की ओर से अमित शाह, जेपी नड्डा समेत पार्टी के सीनियर नेताओं ने मीटिंग की। इसमें नीतीश कुमार समेत तमाम सहयोगियों को लोकसभा में किस तरह की हिस्सेदारी दी जाएगी, इस पर चर्चा की गई। क्या है RJD का प्लान B?RJD ने भी नीतीश कुमार के गठबंधन छोड़ने के बाद प्लान B पर काम करना शुरू कर दिया है। पार्टी की तरफ से न सिर्फ अपने विधायकों को एकजुट रखने की तैयारी की बल्कि जीतन मांझी और जेडीयू के असंतुष्ट विधायकों से संवाद भी स्थापित करने की कोशिश की जा रही है। आरजेडी सूत्रों ने कहा कि इस बार आसानी से सरेंडर नहीं करेंगे और अगर नीतीश पाला बदलते हैं तो उनकी ओर से भी गंभीर पलटवार होगा।JDU की क्या है चुनौती?इस बार जेडीयू के सामने सत्ता परिवर्तन के बाद की चुनौती अभी से शुरू है। बीजेपी ने पहले ही संकेत दे दिया कि वह इस बार पूरी शर्त नहीं मानेगी। सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल में इस बार गृह और वित्त बीजेपी अपने पास रख सकती है। ऐसा हुआ तो पहली बार होगा जब नीतीश के सीएम रहते गृह विभाग उनके पास नहीं रहेगा। दरअसल इस बार जेडीयू बारगेन की स्थिति में नहीं है। साथ ही कहीं न कहीं नीतीश कुमार की लोकप्रियता ढलान पर मानी जा रही है।नीतीश क्यों नाराज हुए कांग्रेस से?नीतीश कुमार का I.N.D.I.A. से अलग होने के पीछे कांग्रेस से उनकी शिकायत भी रही। नीतीश कुमार के करीबी सूत्रों ने कहा कि तमाम विपक्षी दलों को उन्होंने एकजुट किया। पहली मीटिंग पटना में की। एक सीनियर जेडीयू नेता ने कहा कि कांग्रेस को छोड़कर तीसरा मोर्चा बनाने की बात चल रही थी, जिसे नीतीश ने इसे खारिज किया। लेकिन जब I.N.D.I.A. गठबंधन ने आकार लिया तो कांग्रेस ने उन्हें जिम्मेदारी देनी तो दूर, कमतर आंकने लगी। साथ ही इसी महीने I.N.D.I.A. गठबंधन की मीटिंग में जिस तरह उनका नाम संयोजक के रूप में घोषित कर फिर टाला गया, उससे वह बेहद नाराज हुए। I.N.D.I.A. गठबंधन बिखर गया!नीतीश कुमार के I.N.D.I.A. गठबंधन से अलग होने को विपक्ष के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। नीतीश कुमार के I.N.D.I.A. से हटने के बाद तमाम दूसरे क्षेत्रीय दलों का दबाव कांग्रेस पर बढ़ गया है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने कांग्रेस से सीट शेयरिंग करने की संभावना को खारिज कर दिया है। उधर, अखिलेश यादव ने नीतीश के बहाने कांग्रेस की सुस्ती पर निशाना साधा है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पार्टी ने मामले की गंभीरता को समझा है और खुद खरगे ने शुक्रवार को तमाम सहयोगियों से बात की है।बिहार के लिए ज़रूरी हैं नीतीश?नीतीश कुमार के बारे में लगातार सवाल उठ रहे हैं कि वह बार-बार अपनी बातों से पलट जाते हैं। लेकिन इससे बड़ा सवाल है कि ऐसे आरोप लगाने वाले दल उन्हें अपने खेमे में लेने के लिए आतुर क्यों रहते हैं? पिछले दिनों अमित शाह ने बिहार का खासकर दौरा यह संदेश देने के लिए किया था कि अब नीतीश कुमार के लिए बीजेपी के दरवाजे बंद हैं, लेकिन उसके कुछ महीने बाद पार्टी को अपना दरवाजा खोलना पड़ा। दरअसल राज्य में आरजेडी और बीजेपी दोनों दलों के पास अपना मजबूत वोट बैंक है लेकिन इन दोनों की ताकत में नीतीश कुमार एक्स फैक्टर बनते रहे हैं। वह जिधर जाते हैं, उसका पलड़ा अपेक्षाकृत भारी हो जाता है। यह हर चुनाव में साबित भी हुआ है। नीतीश के पास एक खामोश वोट बैंक है, जिनमें बड़ा तबका अतिपिछड़ा का है। ऐसे में जब तक नीतीश कुमार के वोट में आरजेडी या बीजेपी पूरी तरह सेंध नहीं मार पाती, वह सबसे लिए जरूरी बने रहेंगे।बिहार में सीटों का पूरा गुणा गणित इस तरह समझेंबिहार विधानसभा में कुल सीटें 243बहुमत का आंकड़ा- 122अगर नीतीश NDA में जाते हैं तो…BJP- 78JDU-45HAM- 4महागठबंधनRJD-79कांग्रेस-19लेफ्ट-16AIMIM-1कुल-115निर्दलीय-1