ASI बन गया हिंदुत्व का गुलाम… ज्ञानवापी रिपोर्ट पर गुस्से में असदुद्दीन औवेसी, किया सनसनीखेज कमेंट

हैदराबाद: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) की ओर से जारी उस रिपोर्ट की आलोचना की है, जिसमें कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जिस क्षेत्र में ज्ञानवापी मस्जिद स्थित है, वहां पहले एक विशाल हिंदू मंदिर था। ज्ञानवापी मामले में हिंदुओं की ओर से पैरवी कर रहे वकील विष्णु शंकर जैन के एएसआई की रिपोर्ट को लेकर कही बातों को ओवैसी ने खारिज कर दिया। असदुद्दीन ओवैसी ने इस तरह की स्टडी करने वाले एएसआई को हिंदुत्व का गुलाम बताया। ओवैसी ने रिपोर्ट को वैज्ञानिक स्टडी का मजाक बताकर इस तरह के सर्वेक्षण की कड़ी आलोचना की है। ओवैसी ने कहा कि ज्ञानवापी परिसर पर एएसआई की ओर से जारी की गई रिपोर्ट किसी भी पेशेवर पुरातत्वविद् या इतिहासकार की अकादमिक जांच पर खरी नहीं उतरती है। उन्होंने इस बात पर गहरा गुस्सा जताया कि यह रिपोर्ट अटकलों के आधार पर तैयार की गई है। इसमें वैज्ञानिक अध्ययनों का मजाक उड़ाया गया है। ओवैसी ने सनसनीखेज आरोप लगाए गए कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग हिंदू धर्म का गुलाम बन गया है। ओवैसी ने इस बात से इनकार किया कि एएसआई सर्वेक्षण में उल्लेख किया गया है कि वर्तमान संरचना के निर्माण से पहले वहां एक विशाल हिंदू मंदिर था। हिन्दू पक्ष ने पढ़ी रिपोर्ट दरअसल हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने गुरुवार को एएसआई की ओर से मीडिया को जारी की गई रिपोर्ट पढ़ी। उन्होंने कहा कि इस बात के सबूत हैं कि ज्ञानवापी में विशाल हिंदू मंदिर को तोड़कर मौजूदा ढांचा बनाया गया था। कहा जाता है कि 17वीं सदी में एक हिंदू मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी। विष्णु शंकर जैन के अनुसार, पुरातत्व विभाग के अधिकारियों के सर्वेक्षण से पता चला है कि वर्तमान मस्जिद हिंदू मंदिर के स्तंभों से बनाई गई थी। मस्जिद के दक्षिणी हिस्से की दीवार किसी हिंदू मंदिर की बताया गया है कि इस बात का संदेह है कि मस्जिद के दक्षिणी हिस्से की दीवार किसी हिंदू मंदिर की है। यह पता चला कि मंदिर की मूर्तियों को नष्ट कर दिया गया था और फिर से मस्जिद के निर्माण में इस्तेमाल किया गया था। कहा जाता है कि मंदिर निर्माण के संबंध में 34 प्रमुख विधायी साक्ष्य उपलब्ध हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस परिसर में देवनागरी, तेलुगु और कन्नड़ भाषाओं की लिपियां हैं।