अमेर‍िका में आर्ट की प्रोफेसर ने क्‍लास में दिखाई पैंगबर मोहम्‍मद की तस्‍वीरें, यूनिवर्सिटी ने बाहर निकाला, व‍िवाद

वॉशिंगटन: एक अमेरिकी प्रोफेसर एरिका लोपेज को उनके पद से हटा दिया गया है। एरिका मिनेसोटा में हैमलाइन यूनिवर्सिटी में काम करती थीं। उन्‍होंने अपने छात्रों को पैंगबर मोहम्‍मद की तस्‍वीर दिखाई थी। इसके बाद से ही एक विवाद शुरू हो गया था। एरिका ने तो तस्‍वीरें दिखाई थीं उसके बाद शैक्षिक आजादी और धर्म पर एक नई बहस शुरू हो गई है। कहा जा रहा है कि एरिका ने मुसलमान छात्रों को भड़काने का काम किया है। यह सारा मामला अक्‍टूबर 2022 का है और इसकी वजह से मिनेसोटा में काफी विवाद रहा था। प्रोफेसर ने मांगी माफी एरिका हैमलाइन यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर थीं और आर्ट पढ़ाती थीं। एरिका ने न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स से कहा कि उन्‍हें इस बात की जानकारी थी कि मुसलमान इस तरह की तस्‍वीरों को प्रदर्शित करने से बचते हैं। एरिका का कहना है कि उन्‍होंने छात्रों को चेतावनी दी थी कि वह सिर्फ सेलेबस के समय ही इस तरह की तस्‍वीरों को दिखाएंगी। एरिका का कहना है कि 14वीं सदी की जो तस्‍वीर उन्‍होंने दिखाई वह मुश्किल से एक मिनट तक छात्रों के सामने थीं। लेकिन एक मुसलमान छात्र ने उनके खिलाफ शिकायत कर दी थी। बाद में लोपेज ने एक ई-मेल के जरिए छात्रों से माफी मांगी। छात्रों ने उठाया सवाल माफी के बाद भी एरिका को उनके पद से हटाने का फैसला किया गया। यूनिवर्सिटी के अखबार ‘द ऑरेकल’ के मुताबिक इस तरह से तस्‍वीर को दिखाना ‘असम्‍मानिय और इस्‍लामोफोबिक’ है। एरिका को हटाने के बाद यूनिवर्सिटी के करीब 2000 अंडरग्रेजुएट छात्र फ्री स्‍पीच, शैक्षिक लाइब्रेरी और मुसलमानों की आस्‍था को लेकर सवाल कर रहे हैं। उनका कहना है कि पैंगबर मोहम्‍मद की किसी भी तस्‍वीर को दिखाना अपवित्रीकरण कैसे हो सकता है। यूनिवर्सिटी के फैसले की निंदा फाउंडेशन फॉर इंडीव्‍युजल राइट्स एंड एक्‍सप्रेशन (FIRE) की तरफ से हैमलाइन के डायरेक्‍टर फेनेसी मिलर को चिट्ठी लिखी है। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी ने अपने खुद के उस वादे को तोड़ा है जिसमें शैक्षिक स्‍वतंत्रता और मुक्‍त विचारों की बात कही गई है। उनकी मानें तो अगर यूनिवर्सिटी शैक्षिक आजादी के लिए वचनबद्ध है तो फिर वह किसी फैकल्‍टी के खिलाफ कक्षा में शैक्षणिक रूप से प्रासंगिक सामग्री प्रदर्शित करने के लिए कोई एक्‍शन नहीं ले सकती है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है कि किस छात्र को इससे कितनी तकलीफ हो रही है। एकेडमिक फ्रीडम अलायंस और पेन अमेरिका ने भी यूनिवर्सिटी की निंदा की है।