रात ही हो गया था अनहोनी का एहसास! पीतमपुरा हादसे में उजड़ा अनीता का संसार, बेटी पूछ रही पापा कब आएंगे

नई दिल्ली: दिल्ली के पीतमपुरा इलाके में गुरुवार को एक इमारत में आग लग गई। हीटर या किसी घरेलू उपकरण की वजह से लगी इस आग में झुलसकर 6 लोगों की मौत हो गई। उन 6 लोगों में एक अन्नू के पिता संतोष भी शामिल थे। संतोष की पत्नी अनीता ने बताया कि उन्हें किसी अनहोनी का रात को ही एहसास हो गया था। रुंधे गले से अनीता बताती हैं कि उनका तो पूरा परिवार खत्म हो गया है। संतोष के अलावा घर में अब कोई कमाने वाला नहीं। परिवार के लिए वह दिन-रात मेहनत करते थे। अनिता के अनुसार, बीती शाम करीब सात बजे उनकी अंतिम बार संतोष से बात हुई थी। संतोष से पूछा था कि क्या खाना खाएंगे। नौ बजे तक घर नहीं पहुंचने पर अनिता ने पति को फोन किया। एक बार फोन नहीं उठाने पर उन्हें लगा कि काम में बिजी होंगे, लेकिन कुछ देर तक उनका फोन नहीं आने पर उन्होंने फिर से कॉल किया। इस बार भी पूरी घंटी बजी, लेकिन फोन नहीं उठा। इस बीच अनिता को किसी अनहोनी की आशंका सताने लगी। वह लगातार पति को फोन मिलाने लगीं।करीब आधा घंटे बाद एक पुलिसकर्मी ने फोन उठाया और अनिता को हादसा होने की सूचना दी। पुलिसकर्मी ने बताया कि सभी को आंबेडकर अस्पताल ले जाया गया हैं। अनिता ने तुरंत पति के जीजा कुलदीप को घटना की सूचना दी। उसके बाद चार साल की बेटी अनन्या को लेकर अस्पताल पहुंचीं। लेकिन कुछ ही देर में संतोष की मौत की सूचना ने अनिता के हंसती-खेलती दुनिया को उजाड़ दिया।अनिता ने बताया कि वो लोग यूपी के रायबरेली के रहने वाले हैं। गांव में जमीन नहीं होने के कारण परिवार के साथ दिल्ली आ गए। दिल्ली में शालीमार बाग के सिंगालपुर गांव में किराए के मकान में रहने लगे। परिवार का पेट पालने के लिए संतोष सुबह के समय ई-रिक्शा चलाते थे और शाम को घरों में कुक का काम करते थे। ‘सरकार से मदद मिले तो मासूम की पढ़ाई-लिखाई हो जाए’संतोष की चार साल की बेटी अनन्या घटना से अनजान है। वह बार-बार पूछती है, पापा काम पर से घर कब आएंगे। वहीं, संतोष के जीजा कुलदीप ने सरकार से आर्थिक सहायता की मांग की है। कुलदीप का कहना है कि संतोष की पत्नी पढ़ी-लिखी नहीं, ऊपर से दिल्ली में इनका कोई घर भी नहीं है। छोटी सी बच्ची है। सरकार से थोड़ी मदद मिल जाए तो मासूम की अच्छे से पढ़ाई-लिखाई हो जाए। संतोष इस बार बच्ची को स्कूल में डालने वाले थे। वह चाहते थे कि उनकी बेटी अच्छे स्कूल में पढ़ सके।