जुबां पर ऑल इज वेल लेकिन चेहरे पर मायूसी… आलाकमान के फैसले पर प्रतिभा सिंह की यह तस्वीर क्या कह रही है?

शिमला: हिमाचल प्रदेश में करीब 48 घंटों की माथापच्ची के बाद कांग्रेस आलाकमान ने नए मुख्यमंत्री का चुनाव कर लिया। वरिष्ठ नेता हिमाचल प्रदेश के नए मुख्यमंत्री (Sukhwinder Singh Sukhu Himachal CM) होंगे। आलाकमान के इस फैसले से हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी () को करारा झटका लगा है। आलाकमान ने हिमाचल कांग्रेस के इस कद्दावर परिवार (Virbhadra Singh Family) को नजरअंदाज करके नए चेहरो के सत्ता सौंप दी है। प्रतिभा सिंह को उससे भी बड़ा झटका यह लगा कि डिप्टी सीएम पद की रेस में खड़े उनके पुत्र विक्रमादित्य सिंह () को भी आलाकमान ने दरकिनार कर दिया। उनकी जगह को डिप्टी सीएम ( Himachal Deputy CM) बनाने का फैसला किया। कयास लगाए जा रहे थे कि हिमाचल प्रदेश की नई कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री के साथ दो डिप्टी सीएम हो सकते हैं। लेकिन ऐसा हुआ नहीं और वीरभद्र फैमिली को झटके पर झटका मिला। इसका असर प्रतिभा सिंह के चेहरे पर साफ दिखा।

ऑल इज वेल तो फिर लटका चेहरा क्यों?

कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद आलाकमान के फैसले से मीडिया को अवगत कराने की बारी आई तो अन्य नेताओं के साथ खड़ीं प्रतिभा सिंह का चेहरा बिल्कुल लटका हुआ दिखा। उनके चेहरे पर मायूसी का भाव साफ-साफ दिख रहा था। हालांकि, उन्होंने मीडिया के सवालों पर कहा- ऑल इज वेल यानी सब ठीक है। दिल्ली में बैठी कांग्रेस आलाकमान ने जो फैसला लिया, उन्हें वह पूरी तरह मंजूर है। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का फैसला सर्वमान्य है जिससे वो भी बाहर नहीं हैं। यही बात मुख्यमंत्री चुने गए सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी कही। मजे की बात यह है कि उन्होंने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम तक नहीं लिया।

कहीं बगावत तो नहीं कर देगा वीरभद्र परिवार?

बहरहाल, प्रश्न यह है कि प्रतिभा सिंह का लटका हुआ चेहरा भविष्य के लिए कुछ संकेत तो नहीं दे रहा है? क्या अभी सोनिया, राहुल, प्रियंका के फैसले पर रजामंदी जताने वाली प्रतिभा सिंह आने वाले दिनों में अपनी नाराजगी तो जाहिर नहीं करेंगी? इन सवालों को बेतुका नहीं माना जा सकता है क्योंकि कांग्रेस में अंदरूनी झगड़ों के कई उदाहरण एकसाथ देखने को मिल रहे हैं। राजस्थान का ही उदाहरण ले लीजिए। वहां सीएम अशोक गहलोत और प्रमुख नेता सचिन पायलट के बीच खींचतान लंबे समय से चली आ रही है। ऐसे में अगर हिमाचल प्रदेश में भी वीरभद्र परिवार ने मोर्चा खोलने का फैसला ले लिया तो वहां कांग्रेस के लिए काफी मुश्किलें पैदा हो जाएंगी क्योंकि यह परिवार हिमाचल की राजनीति में काफी प्रभावी है।प

हिमाचल में सरकार बदलने की परंपरा कायम

ध्यान रहे कि हिमाचल प्रदेश की नई सरकार रविवार को शपथ ग्रहण करेगी। 68 सदस्यीय हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस पार्टी को 40 सीटें हासिल हुई हैं और उसने हर पांच वर्ष में सत्ता परिवर्तन की प्रादेशिक परंपरा को जिंदा रखा है। पिछले पांच साल से हिमाचल प्रदेश की सत्ता में रही बीजेपी को इन चुनावों में 25 सीटों पर सिमट गई। यह अलग बात है कि कांग्रेस पार्टी के मुकाबले उसे सिर्फ 0.90 प्रतिशत ही कम वोट मिले हैं। कांग्रेस को हिमाचल विधानसभा चुनावों में जहां 43.90 प्रतिशत वोट मिले तो बीजेपी को पूरे 43 प्रतिशत वोट हासिल हुए। अगर वोटों की संख्या की बात करें तो कांग्रेस को 18,52,504 वोट तो बीजेपी को 18,14,530 वोट हासिल हुए। यानी, सिर्फ 37,947 वोटों की कमी से हिमाचल प्रदेश की सत्ता बीजेपी से छिन गई।