लखनऊ से दिल्ली के सदन तक सपा का चेहरा तलाशने में जुटे अखिलेश, MY और PDA समीकरण पर जोर

प्रेम शंकर मिश्र, लखनऊ: समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) में उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक सदन के लिए चेहरों की तलाश जारी है। लोकसभा के लिए जहां पार्टी को उपनेता और सचेतक तलाशने हैं। वहीं, यूपी के दोनों सदनों के लिए अगुआ का भी चयन होना है। पार्टी की नजर इन पदों के जरिए भी PDA के उस समीकरण को और पुख्ता करने पर है जिसने उसे जीत के ट्रैक पर लौटाने में अहम भूमिका निभाई है। सोमवार को दिल्ली में सपा मुखिया () सांसदों के साथ बैठक में लोकसभा में अलग-अलग भूमिकाओं के लिए चेहरे तय कर सकते हैं।नई संसद का विशेष सत्र सोमवार को शुरू होगा। इसमें पहले दो दिन नवनिर्वाचित सांसदों की शपथ होगी। सपा के सभी सांसद रविवार की शाम तक दिल्ली पहुंच जाएंगे। सोमवार की सुबह अखिलेश की सांसदों के साथ बैठक प्रस्तावित है। इसमें उपनेता और सचेतक का नाम तय होने के आसार है।कोर के साथ दलित, गैर-यादव ओबीसी साधेंगे?अखिलेश यादव सपा के संसदीय दल के नेता होंगे। लोकसभा में पार्टी के 37 सदस्य हैं। सपा सदस्य संख्या के मामले में भाजपा और कांग्रेस के बाद देश की तीसरी सबसे पार्टी है। इसलिए, लोकसभा में पार्टी की अगुआई अखिलेश ही करेंगे। लोकसभा में दूसरी भूमिकाओं के जरिए कोर वोट के साथ ही अखिलेश दलित व गैर-यादव ओबीसी साधने का भी दांव खेल सकते हैं। सूत्रों के अनुसार फैजाबाद के सांसद अवधेश प्रसाद, लालगंज के सांसद दारोगा प्रसाद सरोज, मुजफ्फरनगर के सांसद हरेंद्र मलिक, अंबेडकरनगर के सांसद लालजी वर्मा और बस्ती के सांसद राम प्रसाद चौधरी इस रेस में आगे हैं। अवधेश के जरिए भाजपा के अयोध्या कार्ड फेल होने के संदेश को सपा लगातार हवा दे रही है। इसलिए, सदन के भीतर उनको आगे रखकर इस संदेश को भी आगे बढ़ाया जा सकेगा और दलित वोटरों में भी भागीदारी की बात पहुंचाई जा सकेगी। वहीं, बाकी नाम भी पहले सदनों में रहे हैं और संसदीय परंपराओं से बखूबी परिचित हैं।परिषद में पुराना चेहरा या नए समीकरण?दो साल बाद सपा ने विधान परिषद में 1/10 की सदस्य संख्या का मानक पूरा कर लिया है। इसलिए, यहां भी नेता प्रतिपक्ष का पद उसे वापस मिलना तय है। अगले महीने विधानमंडल के मानसून सत्र में यह ताजपोशी हो जाएगी। देखना यह है कि सपा पुराने चेहरे को चुनती है या नए समीकरण को तरजीह देती है। नेता प्रतिपक्ष का दर्ज छीनने तक लाल बिहारी यादव के पास यह जिम्मेदारी थी। वह अब भी सदन में मौजूद है। हालांकि, अब पूर्व मंत्री और सपा के वरिष्ठ नेता बलराम यादव भी परिषद पहुंच चुके हैं। इसलिए, उनको भी दावेदार माना जा रहा है। चर्चा यह भी है कि विधानसभा में अगर सपा किसी यादव को नेता प्रतिपक्ष बनाती है तो परिषद में मुस्लिम चेहरे को जिम्मेदारी देकर कोर वोटरों को साधा जा सकता है। परिषद में सपा के पास दो मुस्लिम सदस्य मोहम्मद जासमीर अंसारी और शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली हैं।विधानसभा में नेता के साथ सचेतक की भी तलाशअखिलेश यादव के दिल्ली की अगुआई के फैसले के बाद विधानसभा में भी सपा को नेता प्रतिपक्ष चुनना है। वहीं, पार्टी के मुख्य सचेतक रहे मनोज पांडेय ने राज्यसभा चुनाव के पहले पाला बदल लिया था। इसलिए, उसका विकल्प भी तलाशा जाना है। फिलहाल, यहां नेता प्रतिपक्ष में रेस में अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव के साथ बसपा से आए रामअचल राजभर, इंद्रजीत सरोज जैसे चेहरों को माना जा रहा है। शिवपाल यादव मायावती सरकार के समय नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। हालांकि, उनको चेहरा बनाए जाने से परिवारवाद का ठप्पा और गाढ़ा होने का भी खतरा है। वहीं, बाकी चेहरों से सपा गैर-यादव ओबीसी या दलितों को साथ रखने और साधने की कवायद आगे बढ़ा सकेगी। अखिलेश खुद भी इशारा कर चुके हें कि ऐसा चेहरा चुनने पर जोर होगा जिससे पार्टी के वोट को और बढ़ाया जा सके।