मून वॉक के बाद अब सूर्य को ‘हेलो’, भारत ने रचा इतिहास, आदित्य मंजिल तक पहुंचा

बेंगलुरु: चांद पर चंद्रयान-3 की मून वॉक के बाद अब भारत ने सूरज की स्टडी करने के लिए स्पेसक्राफ्ट आदित्य L1 को उसकी मंजिल तक पहुंचा दिया है। आदित्य-L1 126 दिनों में 15 लाख किमी की दूरी तय करने के बाद शनिवार को अपनी मंजिल लैंगरैंज पॉइंट L1 पर पहुंच गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर एक पोस्ट में यह जानकारी दी। PM ने लिखा, ‘भारत का पहला सोलर ऑब्जर्वेटरी आदित्य-L1 अपने लक्ष्य तक पहुंच गया है। यह दिखाता है कि कैसे हमारे वैज्ञानिकों के प्रयास मुश्किल और पेचीदा अंतरिक्ष अभियानों को हकीकत में बदल रहे हैं। हम मानवता के हित के लिए विज्ञान की नई सीमाओं को आगे बढ़ाना जारी रखेंगे।’ अब आदित्य L1 पॉइंट से सूरज के चक्कर लगाएगा और ग्रहण जैसी बाधाओं से आगे बढ़कर नए रहस्य खोलेगा। L1 पॉइंट धरती और सूर्य की कुल दूरी का सिर्फ 1 फीसदी ही है। L1 वह पॉइंट है जहां धरती और सूर्य के बीच गुरुत्वाकर्षण बल बैलेंस हो जाता है। हालांकि, यह पॉइंट पूरी तरह से स्टेबल नहीं है, इसलिए आदित्य-L1 स्पेसक्राफ्ट को इस ऑर्बिट में बनाए रखने के लिए लगातार मॉनिटरिंग करनी होगी। समय-समय पर थ्रस्टर्स की मदद से स्पेसक्राफ्ट को निर्देश देगा।क्या है इस मिशन का मकसद?- आदित्य अपने साथ कुल 7 पेलोड्स लेकर गया है। यह सूर्य की सबसे बाहरी सतह की स्टडी करेगा जिसे फोटोस्फेयर और क्रोमोस्फेयर के नाम से जाना जाता है।- यह स्पेस के मौसम और वहां की हलचल की स्डडी करेगा। सोलर विंड के कारणों को समझने की कोशिश करेगा।- L1 पॉइंट से आदित्य ऑब्जर्वेटरी को सूर्य साफ और लगातार नजर आएगा।- अपनी खास जगहों से आदित्य के 4 उपकरण सीधे सूर्य पर नजर रखेंगे। बाकी तीन उपकरण L1 पॉइंट के आसपास क्षेत्र और कणों की स्टडी करेंगे।- ISRO को उम्मीद है कि यह मिशन ऐसी अहम जानकारियां देगा जिससे सूर्य के बारे में हमारी समझ और बेहतर होगी।सूर्य की स्टडी क्यों है जरूरी?सूर्य का स्टडी काफी अहम है क्योंकि यह सौरमंडल में हमारा सबसे नजदीकी तारा है। ग्रह इसी से अपनी एनर्जी लेते हैं। आदित्य-L1 स्पेस के मौसम को बेहतर ढंग से समझने में भी मदद करेगा। सूर्य लगातार रेडिएशन, गर्मी, कण और मैग्नेटिक फील्ड धरती पर असर डालते हैं।