मुस्लिम लड़कियों के कैटवॉक के बाद अब फिर श्रीराम कॉलेज चर्चा में

बात कुछ भी नहीं है और जमीयत ने बतंगड़ बना दिया.अबकी बार जमीयत ने मुस्लिम लड़कियों के अपने हाथ पर श्रीराम की मेंहदी लगाये जाने की कथित खबरों को धार्मिक रंग दे दिया. घटना मुजफ्फरनगर के श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेज से जुड़ी है. यह कालेज कुछ माह पूर्व तब चर्चा में आया था जब बुर्के में मुस्लिम लड़कियों के कैटवॉक किया था,इसके बाद अब मुस्लिम लड़कियों के कथित रूप से मेहंदी लगवाने पर विवाद खड़ा हो गया है.इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित वीडियो में हाथों में मेहंदी से श्रीराम लिखवाती श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेज की छात्राओं को मुस्लिम बताते हुए जमीयत उलमा के पदाधिकारियों ने पुलिस से शिकायत की है. पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि इससे धार्मिक भावनाओं को आहत किया है. जमीयत पदाधिकारियों ने इस मामले में पुलिस से कार्रवाई की मांग की है.जबकि कॉलेज प्रशासन ऐसी किसी घटना  से साफ इंकार कर रहा है.   दरअसल, गत दिवस जमीयत उलमा जिला मुजफ्फरनगर के प्रतिनिधिमंडल ने एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापत से मुलाकात कर उन्हें एक शिकायती पत्र सौंपा था,जिसमें जिला संयोजक मौलाना मुकर्रम अली ने आरोप लगाया था कि श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेज आए दिन ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करा रहा है, जिससे मुस्लिम भावनाओं को ठेस पहुंचती है।    प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कुछ दिन पूर्व बुर्के में लड़कियों से फैशन शो कराया गया था. इससे मुस्लिम समाज के लोगों की भावनाएं आहत हुई. अब इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो से उन्हें ज्ञात हुआ कि श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेज में मेहंदी प्रतियोगिता में मुस्लिम छात्राओं के हाथों पर श्रीराम लिखवाया. उन्होंने कहा कि यह कार्य मुस्लिम समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत करता है. इसलिए उक्त प्रकरण की जांच कराकर कार्रवाई कराई जाए.एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापत ने मामले की जांच का आश्वासन दिया,लेकिन यदि मुस्लिम लड़कियों ने बिना किसी दबाव के हाथों में मंेहदी लगाई थी तो इसमें जमीयत क्यों कूद पड़ा.    उधर,श्रीराम ग्रुप ऑफ कॉलेज के विभागाध्यक्ष, पत्रकारिता जनसंचार विभाग रवि गौतम का कहना है कि कालेज में प्रतियोगिता का आयोजन बहुआ था. उसमें मुस्लिम लड़कियों के हाथों पर श्रीराम नहीं लिखवाया गया और न ही श्रीराम का चित्र बनवाया गया. जितनी भी छात्राओं ने अपने हाथ पर मेहंदी से श्रीराम लिखा, वह सभी हिंदू हैं. मुस्लिम लड़कियों के हाथों पर श्रीराम लिखवाने का आरोप बेबुनियाद है.