1897 में बलूचिस्तान खान हादसे के बाद सुरक्षा कानूनों को कड़ाई से लागू करने की हुई पहल, 123 सालों का हुआ DGMS

धनबाद: 1902 में स्थापित हुआ महानिदेशालय यानी कि ने 7 जनवरी को अपना 123 वां स्‍थापना दिवस मना रहा है। इसका काम खनन के दौरान सुरक्षा मानकों का अनुपालन कराना है। खान निरीक्षण ब्‍यूरो के नाम से इसकी स्थापना 1902 में हुई थी। बाद में इसी का नाम बदलकर डीजीएमएस रख दिया गया। धनबाद में है डीजीएमएस का सेंट्रल जोन 123 साल का हो चुका इस डीजीएमएस की कार्य प्रणाली में लगातार बदलाव हो रहे हैं, जो कि खनन क्षेत्र में बदलाव के साथ इसने अपने नियमों में काफी बदलाव किया है। डीजीएमएस का मुख्यालय धनबाद के हीरापुर में एनएच 32 पर है। यहीं खान सुरक्षा महानिदेशक का दफ्तर भी है। इसी परिसर में डीजीएमएस का सेंट्रल जोन भी है। इसके अलावा डीजीएमएस के इस्टर्न जोन का मुख्यालय पश्चिम बंगाल के सीतारामपुर, साउथ इस्टर्न जोन का रांची, नॉर्थ जोन का गाजियाबाद, नॉर्थ वेस्ट जोन का उदयपुर, साउथ सेंट्रल जोन का हैदराबाद, साउथ जोन का बेंगलुरु और वेस्टर्न जोन का मुख्यालय नागपुर में है। वर्ष 1885 तक की पुरानी फाइलों की सुरक्षित कस्टडी धनबाद में खान सुरक्षा महानिदेशालय (डीजीएमएस) भवन लगभग 114 साल पुराना है और यह धनबाद की सबसे पुरानी विरासत इमारतों में से एक है। भवन को नियमित हाउसकीपिंग और रख-रखाव करके अपने मूल रूप में बनाए रखा जा रहा है। इस विशेष अभियान के दौरान, डीजीएमएस, मुख्यालय में 100 साल से अधिक पुराने रिकॉर्ड रूम पर विशेष ध्यान दिया गया। क्योंकि इसमें वर्ष 1885 तक की पुरानी फाइलों की सुरक्षित कस्टडी थी। 1897 के हादसे के बाद हुई थी महानिदेशालय की पहल खान सुरक्षा की आवश्‍यकता 1897 में बलूचिस्तान (अब पाकिस्तान) में हुए खान हादसे के बाद महसूस की गई। इसके बाद कोलार गोल्ड फील्ड दुर्घटना में 52 और फिर खोस्त में कोयला खान हादसे में हुई 47 मौतों के बाद सुरक्षा कानूनों को कड़ाई से लागू करने की पहल की गई। वैसे तो देश में खनन का इतिहास 1774 से माना जाता है, जब ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक इंग्लिश कंपनी को रानीगंज कोल फील्ड में खनन की अनुमति दी थी। धरती की सतह के नीचे से कोयला और अन्य खनिज खोदकर निकालना पड़ता था। इस लिहाज से खान सुरक्षा महानिदेशालय अस्तित्व में आया। खनन में सुरक्षा मानकों का अनुपालन कराने की जिम्मेदारी डीजीएमएस का कार्य सुरक्षा मानकों का अनुपालन कराना है। डीजीएमएस के मार्गदर्शन में खनन के विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जैसे कोयले की आग से निपटने के लिए अपनाई गई पद्धति, मैन राइडिंग सिस्टम (भूमिगत खान श्रमिकों की थकान को रोकने के लिए), पर्यावरण संरक्षण पहल (जैसे पार्कों का विकास, बंजर भूमि-ओवरबर्डन पर पौधों की विभिन्न प्रजातियों को शामिल करना) खनन कंपनियों की ओर से कार्यान्वित किए गए थे। खदानों में दुर्घटनाओं की संख्या में उल्लेखनीय रूप से कमी आई है। वर्ष 2022 में मृत्यु दर घटकर लगभग 0.15 हो गई। संगठन श्रमिकों को शून्य नुकसान के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए काम कर रहा है। 1908 में कोलकाता से धनबाद में स्थापित हुआ मुख्यालय 1902 में खान निरीक्षण ब्यूरो की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्यालय कोलकाता में था। 1904 में इसका नामकरण खान विभाग के रूप में किया गया। 1908 में मुख्यालय कोलकाता से धनबाद में स्थापित हुआ। रविवार को डीजीएमएस का 123वां स्थापना दिवस मनाया गया।