चीन के बाद अमेरिका ने भी लैब में बना लिया ‘नकली सूरज’? खत्म हो जाएगा ऊर्जा संकट, आज बड़ा ऐलान

वॉशिंगटन : अमेरिका ने पहली बार सफलतापूर्वक एक न्यूक्लियर फ्यूजन रिएक्शन को अंजाम दिया है। कैलिफोर्निया में लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी में नेशनल इग्निशन फैसिलिटी में अमेरिकी वैज्ञानिकों ने यह कारनामा कर दिखाया है जिसके परिणामस्वरूप शुद्ध ऊर्जा पैदा हुई है। प्रोजेक्ट से जुड़े एक स्रोत ने सीएनएन को इसकी जानकारी दी है। माना जा रहा है कि अमेरिकी ऊर्जा विभाग मंगलवार को आधिकारिक रूप से इसकी सफलता की घोषणा कर सकता है। न्यूक्लियर फ्यूजन प्रयोग को अक्सर ‘लैब में कृत्रिम सूरज’ का उत्पादन कहा जाता है।

सीएनएन की खबर के अनुसार इस प्रयोग के नतीजे क्लीन एनर्जी के एक अनंत स्रोत को हासिल करने की दशकों लंबी खोज में एक बड़ा कदम साबित हो सकते हैं। इसकी सफलता जीवाश्म ईंधन पर मानव की निर्भरता को खत्म करने में मदद कर सकती है। दशकों से शोधकर्ता लैब में न्यूक्लियर फ्यूजन का प्रयास कर रहे हैं। वे सूर्य को ऊर्जा देने वाले फ्यूजन को पैदा करना चाहते थे। विभाग ने रविवार को घोषणा की थी कि अमेरिकी ऊर्जा सचिव जेनिफर ग्रानहोम मंगलवार को एक ‘प्रमुख वैज्ञानिक सफलता’ की घोषणा करेंगे।

क्या होता है न्यूक्लियर फ्यूजन?न्यूक्लियर फ्यूजन या परमाणु संलयन तब होता है जब दो या दो से अधिक परमाणु एक बड़े परमाणु में जुड़ जाते हैं। इस प्रक्रिया में गर्मी के रूप में भारी ऊर्जा पैदा होती है। परमाणुओं के अलग होने की प्रक्रिया न्यूक्लियर फिजन या परमाणु विखंडन, जिससे पूरी दुनिया में बिजली पैदा की जाती है, में रेडियोएक्टिव कचरा पैदा होता है जबकि न्यूक्लियर फ्यूजन में ऐसा नहीं होता। वर्तमान में दुनियाभर के वैज्ञानिक एक ही लक्ष्य को हासिल करने के लिए अलग-अलग तरीकों से सफलता की ओर बढ़ रहे हैं।

चीन ने बनाया था वर्ल्ड रेकॉर्डनेशनल इग्निशन फैसिलिटी प्रोजेक्ट ने न्यूक्लियर फ्यूजन से ऊर्जा पैदा की। न्यूट्रॉन और अल्फा कणों से इकट्ठा की गई ऊर्जा को ऊष्मा के रूप में निकाला जाता है। इसी ऊष्मा से ऊर्जा पैदा की जा सकती है। पिछले साल ब्रिटेन में कुछ वैज्ञानिकों ने निरंतर ऊर्जा की रेकॉर्ड तोड़ मात्रा पैदा की थी। हालांकि यह सिर्फ 5 सेकेंड तक ही टिक पाई। कुछ महीनों पहले चीन ने न्यूक्लियर फ्यूजन की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की थी। हेफेई में स्थित चीन के न्‍यूक्लियर फ्यूजन रिएक्‍टर से 1,056 सेकंड या करीब 17 मिनट तक 7 करोड़ डिग्री सेल्सियस ऊर्जा निकली थी।