मासूमों के साथ हैवानियत के बाद उन्हें मार देता था, 7 साल में 30 का शिकार, पॉर्न मूवी देखकर बना दरिंदा!

नई दिल्ली : रविंदर कुमार हर दिन मासूम बच्चों को अपनी हवस का शिकार बनाने के लिए घर से निकलता था। टारगेट की तलाश में रोज 40 किलोमीटर तक घूमा करता था। टारगेट थे 12 साल तक के बच्चे। बच्चों को बहला-फुसलाकर उसके साथ दरिंदगी के बाद उन्हें मार दिया करता था। पुलिस के मुताबिक, उसने 2008 से 2015 के बीच 7 साल में करीब 30 मासूमों को शिकार बनाया। एक की उम्र तो महज 2 साल थी। 6 मई को दिल्ली की एक अदालत ने ऐसे ही एक मामले में इस सीरियल-रेपिस्ट हत्यारे को दोषी ठहराया है। सजा का ऐलान 2 हफ्ते बाद होना है।पॉर्न मूवी देखने के बाद बन गया दरिंदारविंदर कुमार के खौफनाक दरिंदा बनने की शुरुआत पॉर्न मूवी देखने से हुई। उसने सीडी प्लेयर पर दो सेमी-पॉर्न हॉरर मूवी देखी और उसका उसके दिलोदिमाग पर ऐसा असर हुआ कि वह सीरियल रेपिस्ट-हत्यारा बन गया। मासूमों के लिए ऐसे बिछाता था जालकुमार मजदूरों के बच्चों को निशाना बनाता था। शाम को जब थके-हारे मजदूर काम से लौटते थे और अपनी झुग्गी में सोने जाते थे तब कुमार वहां टारगेट की तलाश में पहुंचता था। रात 8 बजे से आधी रात के बीच वह बच्चों को 10 रुपये के नोट या मिठाई का लालच देकर पास बुलाता था। फिर उन्हें किसी सुनसान इमारत या खाली खेत में ले जाता था और उनके साथ दरिंदगी करता। पहचान न खुल सके, इस डर से वह दरिंदगी के बाद ज्यादातर बच्चों को मार डालता था।2014 में पहली बार हुआ गिरफ्तारकुमार पहली बार 2014 में गिरफ्तार हुआ। मामला 7 साल के बच्चे के साथ दुष्कर्म और हत्या के प्रयास का था। बच्चे को दुष्कर्म के बाद जान से मारने की नीयत से सेप्टिक टैंक में डाल दिया गया था। उस मामले में जमानत मिलने के बाद वह मजदूर के तौर पर काम करने लगा।सालभर बाद ही दोबारा हुआ गिरफ्तार16 जुलाई 2015 को वह दूसरी बार गिरफ्तार हुआ। तब उसकी उम्र 24 वर्ष थी। तभी से वह दिल्ली की तिहाड़ जेल में कैद है। एक मामले में अदालत ने उसे दोषी ठहराया है। दो हफ्ते में उसकी सजा पर फैसला आएगा। पुलिस ने उसके लिए अधिकतम सजा की मांग की है।पूछताछ में हुए खुलासे से पुलिस टीम भी हिल गई!कुमार को जब गिरफ्तार किया गया तब अडिशनल कमिश्नर विक्रमजीत सिंह आउटर डिस्ट्रिक्ट के डीसीपी थे। सिंह ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, ‘उससे पूछताछ के बाद पूरी टीम हिल गई थी। हम सन्न थे। उसने अपने अपराध का रोंगटे खड़ा कर देने वाला ब्यौरा सुनाया। उसे उसके तकरीबन सभी पीड़ित अच्छी तरह याद थे।’ मासूमों की हत्या के बाद शव के साथ भी करता था दरिंदगी! एसीपी के पद से रिटायर हुए जगमिंदर सिंह दहिया ने अपनी टीम के साथ मिलकर 2015 में इस दरिंदे को गिरफ्तार किया था। तब दहिया बेगमपुर थाने में इंस्पेक्टर थे। उन्होंने बताया कि कुमार सिर्फ एक पीडोफाइल यानी बच्चों का यौन उत्पीड़न करने वाला नहीं है बल्कि एक नेक्रोफाइल भी है। नेक्रोफाइल उसे कहते हैं जो शव के साथ सेक्स करता है, उसके प्रति आकर्षित होता है। पूछताछ के दौरान कुमार ने दावा किया कि उसने उन बच्चियों को मार डाला जिनसे वह रेप नहीं कर पाया। दहिया याद करते हैं, ‘ज्यादातर पीड़ित ग्रामीण इलाकों से थीं और बहुत गरीब परिवार से ताल्लुक रखती थीं।’यूपी के कासगंज का रहने वाला है कुमार के पिता यूपी के कासगंज के एक दिहाड़ी मजदूर थे जो बाद में प्लंबर का काम करने लगे। उसकी मां घरों में बर्तन मांजने और झाड़ू-पोछा का काम करती थी। पुलिस वालों का मानना है कि उसने बचपन में अपने खुद के अनुभवों से ही अंदाजा लगा लिया था कि मजदूरों के बच्चे उसके लिए आसान शिकार साबित होंगे। छठी क्लास के बाद उसने पढ़ाई जोड़ दी और गुजारे के लिए छोटे-मोटे काम करने लगा। बाद में उसने मजदूर के रूप में काम करना शुरू कर दिया और बच्चों को अपनी दरिंदगी का शिकार बनाने लगा।यूं हुआ गिरफ्तारदहिया के मुताबिक, पुलिस एक 6 साल की बच्ची की हत्या के मामले की जांच कर रही थी। नॉर्थवेस्ट दिल्ली के रोहिणी के नजदीक सुखबीर नगर बस स्टैंड के पास बच्ची की लाश मिली थी। पुलिस ने इलाके के कई सीसीटीवी कैमरों को खंगालने के बाद कुमार को गिरफ्तार किया। उसने बेगमपुर इलाके से एक नाबालिग लड़के को भी अगवा किया था और कथित तौर दुष्कर्म के बाद उसका गला काटकर भाग गया था। पुलिस ने एक अंडरकंस्ट्रक्शन बिल्डिंग के सेप्टिक टैंक से उस बच्चे को बचाया था।नशा करने के बाद कंट्रोल खो देता था दरिंदादहिया बताते हैं, ‘शराब पीने या ड्रग्स लेने के बाद कुमार का खुद पर कंट्रोल नहीं रहता था और वह सूरज ढलने के बाद बच्चों की तलाश में निकल जाता था ताकि अपनी हवस मिटा सके। वह शिकार की तलाश में उन जगहों पर चलता था जहां कोई बिल्डिंग बन रही होती थी। कई मौकों पर वह झुग्गी से बच्चों को अगवा करके खाली पड़ी बिल्डिंग या सुनसान जगहों पर ले जाता था और उनके साथ रेप करता था।’दिल्ली-एनसीआर और आस-पास में था सक्रिय2008 में उसने एक लड़की को कराला में उसकी झुग्गी से अगवा किया और रेप के बाद उसकी हत्या कर दी। एक पुलिस अफसर ने बताया, ‘जब शुरुआती कुछ मामलों के बाद वह गिरफ्तार नहीं हुआ तो उसकी जुर्रत बढ़ती चली गई और वह एक के बाद एक लगातार और ज्यादा क्राइम करने लगा।’ अफसर ने बताया, ‘वह बदायूं, बाबा हरिदास कॉलोनी, बेगमपुर, कंझावला और हाथरस समेत दिल्ली-एनसीआर और आस-पास के इलाकों में अपराध करता था।’ शादी समारोह हो या कुछ और…हर वक्त शिकार की तलाश में रहता थाकुमार ने ये भी कबूला कि 2011 में उसने कंझावला और मुंडका में 2 क्राइम किए थे। उसने ये भी कबूल किया कि 2012 में वह अपनी एक रिश्तेदार के यहां शादी में गया था। वहां उसने 14 साल की दो बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाया।कुमार बच्चों की तलाश में ज्यादातर पैदल चला करता था लेकिन कुछ बार उसने बस से भी सफर की। किसी एक जगह पर उसने दो बार अपराध नहीं किया। 2015 में जांच के दौरान उसने पुलिस को कम से कम 15 ऐसी जगहें बताईं जहां उसने दरिंदगी की थी।