हेमंत सोरेन को गिरफ्तार करने के बाद ईडी ऑफिस लाया गया, कोर्ट में किया जाएगा पेश

रांचीः झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को त्यागपत्र देने के बाद ईडी ने गिरफ्तार कर लिया गया। ईडी के अधिकारी उन्हें राजभवन से लेकर सीधे एयरपोर्ट रोड स्थित जोनल ऑफिस पहुंचे। ईडी की ओर से हेमंत सोरेन को कोर्ट में पेश करने के पहले मेडिकल टेस्ट कराने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।राज्यपाल ने सीएम हेमंत सोरेन का त्यागपत्र स्वीकार कियाराजभवन की ओर से रात 10.10 मिनट पर यह जानकारी दी गई कि राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को आज हेमंत सोरेन की ओर से झारखण्ड राज्य के मुख्यमंत्री के पद से त्यागपत्र समर्पित किया गया, जिसे राज्यपाल ने स्वीकार कर लिया।कल्पना सोरेन ईडी ऑफिस हेमंत सोरेन से मिलने पहुंचीझारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी की सूचना के बाद उनकी धर्मपत्नी कल्पना सोरेन रात करीब 10 बजे उनसे मिलने पहुंची। ईडी ऑफिस के बाहर कल्पना सोरेन को काफी देर तक इंतजार भी करना पड़ा। झामुमो समर्थकों ने कहा: अगर मुख्यमंत्री सोरेन जेल जाएंगे तो हम भी उनके साथ जाएंगेसत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सैकड़ों कार्यकर्ता और समर्थक भूमि सौदे से जुड़े कथित धनशोधन मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पूछताछ के विरोध में बुधवार को रांची के मोरहाबादी मैदान में एकत्र हुए। पार्टी के बैनर, पोस्टर थामे हुए और तीर-धनुष प्रदर्शित करते हुए, समर्थकों ने दावा किया कि मुख्यमंत्री को उनकी आदिवासी पहचान के लिए जांच एजेंसी के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार निशाना बना रही है। जमशेदपुर से यहां आईं झामुमो नेता झरना पाल ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हेमंत सोरेन को इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह आदिवासी हैं। लेकिन, वह हमारे लिए भगवान की तरह हैं। हम उनके लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। अगर वह (मुख्यमंत्री) जेल जाएंगे तो हम भी उनके साथ जाएंगे।’ मुख्यमंत्री आवास सहित राज्य की राजधानी के प्रमुख स्थानों पर 100 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू होने के साथ, सोरेन के आवास से कुछ किलोमीटर दूर मोरहाबादी मैदान में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया।हजारीबाग जिले से आए झामुमो समर्थक उमेश ठाकुर ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री को बार-बार परेशान किया जा रहा है, जबकि वह सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने 20 जनवरी को ईडी के सवालों का जवाब दिया था, लेकिन उन्हें एक सप्ताह के भीतर फिर से बुलाया गया। क्या यह जान-बूझकर उन्हें और उनकी सरकार को बदनाम करने का प्रयास नहीं है?’रामगढ़ के तौफीक आलम ने कहा, ‘सरकार को अस्थिर करने के लिए भाजपा हमारे मुख्यमंत्री के खिलाफ साजिश रच रही है। लेकिन, वे अपने मिशन में सफल नहीं होंगे। अगर मुख्यमंत्री को कुछ हुआ, तो झारखंड में तेज आंदोलन होगा।’’