पाकिस्‍तान से हिंदुस्‍तान कभी नहीं आते आडवाणी, एक धमाके ने बदला देश, अब बन गए भारत रत्‍न

इस्लामाबाद: भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता को मोदी सरकार भारत रत्न से सम्मानित करेगी। पीएम मोदी ने ट्वीट कर उन्हें भारत रत्न देने से जुड़ी जानकारी दी। भारत में हिंदुत्व पॉलिटिक्स के वह बड़े चेहरों में से एक रहे हैं। राम मंदिर आंदोलन को लेकर आज तक उन्हें याद किया जाता है। लेकिन अगर भारत पाकिस्तान का बंटवारा शांति से हो जाता तो शायद आडवाणी कराची में रह रहे होते। जी हां, एक बम धमाके के कारण वह भारत आ गए। 1997 में एंड्रयू वाइटहेड को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने इसके बारे में बताया था।आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को पाकिस्तान के कराची में हुआ था। अपनी स्कूली पढ़ाई उन्होंने वहीं से पूरी की और कुछ साल कॉलेज भी गए। कराची से भारत आने के दौरान वह 19 साल के थे। आडवाणी का कहना है कि उनका जन्म सिंध में हुआ था, जो तब 43 लाख की आबादी वाला इलाका था। इसमें 13 लाख हिंदू थे। हिंदू आबादी ज्यादातर शहरों और कस्बों में रहती थी और कराची तब 3-4 लाख की आबादी वाला शहर था। आडवाणी ने इंटरव्यू में तब कहा था कि उन्हें यह जानकर बेहद दुख होता है कि कराची आज सबसे गंदे शहरों में से एक है।भारत आने का नहीं सोचाबंटवारे के समय का आडवाणी ने जिक्र किया। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि 1947 की शुरुआत में चीजें तेजी से बदलने लगीं। अप्रैल मई तक साफ हो गया कि सिंध पाकिस्तान का हिस्सा होगा, जिसे सुनकर उन्हें बहुत बुरा लगा। कराची को लेकर उन्होंने कहा कि बंटवारे से पहले वहां कोई दंगा नहीं हुआ था। बंटवारे के बाद भी स्थिति खराब नहीं हुई, इसलिए मन में यह भावना नहीं आई कि भारत जाना चाहिए। हालांकि कुछ ऐसा हुआ, जिसके बाद उन्होंने कराची छोड़ने का फैसला कर लिया।एक धमाके ने बदल दिया देशआडवाणी के मुताबिक कराची में सितंबर में एक भीषण धमाका हुआ। इस कारण वहां रहने वाले ज्यादातर हिंदू आबादी का मन बदल गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसका आरोप आरएसएस से जुड़े लोगों पर लगा। क्योंकि आडवाणी आरएसएस से जुड़े थे, इसलिए उनके अंदर डर नहीं था। लेकिन लोगों ने उन्हें सलाह दी कि वह अकेले यहां से चले जाएं। 12 सितंबर 1947 को उन्होंने कराची छोड़ दिया। पहली बार उन्होंने प्लेन का सफर किया। एक महीने बाद आडवाणी के परिवार ने भी कराची छोड़ दिया। जनवरी 1948 आते-आते कराची भी दंगों की चपेट में आ गया। पाकिस्तान बनने के बाद भी आडवाणी एक महीने तक वहां रहे।