40 साल… जब ‘गांधी’ फिल्म में शूटिंग का हिस्सा बनने के लिए दिल्ली में जुट गई थी स्टूडेंट्स की भीड़

‘गांधी’ फिल्म को आज 30 नवंबर को रिलीज हुए 40 साल हो रहे हैं। यह भारत में 30 नवंबर 1982 को रिलीज हुई थी। ‘गांधी’ राजधानी के रीगल, कमल तथा विवेक सिनेमा घरों में रिलीज हुई थी। अब ये तीनों बंद हो चुके हैं और सिर्फ यादों में जिंदा हैं। इसे विज्ञान भवन में भी प्रदर्शित किया गया था। बेशक, ‘गांधी’ को देखने के बाद दुनिया ने महात्मा गांधी को करीब से जाना समझा। रिचर्ड एटनबरो ने महान लेखक लुई फिशर द्वारा लिखी गांधी जी की जीवनी ‘द लाइफ ऑफ महात्मा’ को आधार बनाकर ही गांधी का निर्देशन किया था।

जरा सोचिए कि अगर उन्होंने लुई फिशर के काम को ना पढ़ा होता तो क्या गांधी फिल्म बनती। गांधी जी की हत्या के दृश्य को बिड़ला हाउस में शूट किया गया था। वहां पर सारे मंजर को जीवंत करने के लिए दिल्ली के विभिन्न कॉलेजों के छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में पहुंचे थे। उनमें जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के स्पेनिश स्टडीज के छात्र अशोक पिपल भी थे। उन्हें याद है कि शूटिंग से पहले एक महिला बिड़ला हाउस में शूटिंग का हिस्सा बनने के लिए पहुंचे लोगों के बाल काटकर छोटे भी कर रही थी। कुछ इस तरह से ताकि टोपी पहनने के बाद बाल बाहर ना आएं। जिन्हें भीड़ का हिस्सा बनाया गया था उन्हें प्रतिदिन के हिसाब से 75 रुपये मिल रहे थे।

दिल्ली में कहां-कहां गए बेन किंग्सले
‘गांधी’ की शूटिंग से पहले इसमें गांधी का किरदार निभाने वाले सशक्त अभिनेता बेन किंग्सले ने राजधानी में गांधी जी से जुड़े तमाम अहम स्थानों को देखा और महसूस किया। वे पंचकुइयां रोड की वाल्मीकि बस्ती से लेकर 30 जनवरी मार्ग पर स्थित बिड़ला हाउस में गए। वे राजघाट में बार-बार गए। उन्होंने 1991 में इस लेखक को राजधानी के मेरिडियन होटल में कहा था, ‘मैंने गांधी फिल्म को करने से पहले लुई फिशर की लिखी बापू की जीवनी को कई बार पढ़ा था। उसे पढ़ने के बाद मैं बापू और उनके सत्य तथा अहिंसा के सिद्धांतों को जान पाया। इसलिए मैं शायद अपने किरदार के साथ न्याय कर सका था।’ गांधी जी के जीवन पर बनी ‘गांधी’ को आठ ऑस्कर अवॉर्ड मिले थे। ये फिल्म गांधी जी के जीवन पर बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से एक है।

कहां-कहां हुई थी इसकी शूटिंग
गांधी फिल्म की दिल्ली में इंडिया गेट, राष्ट्रपति भवन, दरियागंज पुलिस थाने वगैरह में भी शूटिंग हुई थी। गांधी जी की हत्या वाले सीन को रील की बजाय रीयल-सा दिखाने के लिए हजारों लोगों को शवयात्रा क हिस्सा बनाया गया था। अजीब इत्तफाक है कि गांधी फिल्म की राजधानी में आउटडोर शूटिंग की सारी व्यवस्था करने वाले मशहूर फिल्म निर्माता सुरेश जिंदल का हाल ही में निधन हो गया। बेशक, राजधानी में गांधी की शूटिंग से जुड़ी तमाम लोकेशन सुरेश जिंदल के प्रयासों से मिल गई थीं।

कब लिख दी गई थी ‘गांधी’ की भूमिका
गांधी फिल्म के बनकर रिलीज होने से बहुत पहले ही इसकी भूमिका लिख दी गई थी। महान अमेरिकी लेखक लुई फिशर 25 जून, 1946 को दिल्ली आए। वे सफदरजंग एयरपोर्ट पर विमान से उतरने के बाद सीधे टैक्सी से जनपथ (तब क्वींस एवेन्यू) पर स्थित इंपीरियल होटल पहुंचे। तब तक पालम एयरपोर्ट नहीं बना था। इंदिरा गांधी इंटरनैशनल एयरपोर्ट को तो शुरू होने में दशकों शेष थे। वे जल्दी में थे।। वे इंपीरियल लॉबी में ही अपना समान रखकर होटल से पंचकुइयां रोड पर निकल गए थे। उन्हें वाल्मीकि मंदिर में महात्मा गांधी से मिलना था। वे बापू की जीवनी लिख रहे थे।

फिशर तकरीबन 5 बजे वाल्मीकि मंदिर पहुंचे। उन्हें जनपथ से पंचकुइयां रोड पर पहुंचने में 15 मिनट से अधिक नहीं लगा होगा। तब दिल्ली की सड़कों पर आज की तरह ट्रैफिक कहां होता था। वे जब वहां पर पहुंचे, तब उधर पंडित नेहरू और बहुत-से लोग मौजूद थे। कुछ ही पलों के बाद बापू अपने मंदिर के कमरे से प्रकट होते हैं। वे उन दिनों यहां पर ही ठहरे हुए थे। बापू उन्हें तुरंत पहचान लेते हैं। वे फिशर से अहमदाबाद में मिल चुके थे। दोनों में मित्रता थी। वे फिशर का हाल-चाल पूछते हैं। लुई फिशर इन सब बातों का ‘द लाइफ ऑफ महात्मा’ में विस्तार से जिक्र करते हैं। इन्हें पढ़कर ही रिचर्ड एटिनबरो ने गांधी फिल्म बनाई।