2008 Jaipur bomb blasts: 20 मिनट में हुए थे 9 धमाके और गई 71 जिंदगी, HC ने पलटा फैसला, फांसी की सजा पाने वाले 4 दोषी को किया बरी

राजस्थान उच्च न्यायालय ने 2008 के जयपुर बम धमाकों को लेकर बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने फांसी की सजा पाने वाले चार लोगों को बरी कर दिया। चारो को 2019 में मौत की सजा सुनाई गई थी। 2008 में हुए जयपुर बम धमाके में 71 लोग मारे गए थे और 185 अन्य घायल हो गए थे। अदालत ने आज मोहम्मद सैफ, मोहम्मद सरवर, सैफुर रहमान और मोहम्मद सलमान को बरी कर दिया। तीनों को 2019 में मौत की सजा सुनाई गई थी। गुरुवार को जस्टिस पंकज भंडारी समीर जैन की खंडपीठ ने फैसला सुनाया। अली ने कहा कि अदालत ने राज्य पुलिस से भी ‘अक्षम’ जांच अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है। इससे पहले 2019 में एक विशेष अदालत ने चार व्यक्तियों को दोषी ठहराते हुए पांचवें आरोपी शाहबाज हुसैन को बरी कर दिया था। शाहबाज की ओर से पेश अधिवक्ता अखिल चौधरी ने कहा कि गुरुवार को उच्च न्यायालय ने विशेष अदालत द्वारा 2019 में हुसैन को बरी किए जाने को बरकरार रखा।इसे भी पढ़ें: Rajasthan: चुनावी साल में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का बड़ा फैसला, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी कीचौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने निचली अदालत द्वारा शहबाज को बरी किए जाने के खिलाफ अपील की थी। राज्य सरकार की अपील को आज उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया, जिसने शाहबाज के पक्ष में फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति पंकज भंडारी और न्यायमूर्ति समीर जैन की खंडपीठ ने बुधवार को चारों को बरी करने का फैसला सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में निचली अदालत द्वारा पांचवें व्यक्ति- शाहबाज हुसैन को बरी करने की भी पुष्टि की। इसे भी पढ़ें: Education में आज के फैसलों से राजस्‍थान का भविष्य उज्ज्वल: अशोक गहलोतराजस्थान की राजधानी जयपुर में 13 मई 2008 को शाम लगभग सवा सात बजे 15 मिनट में सिलसिलेवार आठ बम धमाके हुए थे। लगभग 11 साल पहले हुए इन आठ सिलसिलेवार बम धमाकों ने जयपुर के परकोटे शहर को हिला दिया था। इन धमाकों में कम से कम 71 लोगों की मौत हुई थी और 180 से अधिक लोग घायल हुए थे। पहला धमाका चांदपोल हनुमान मंदिर और उसके बाद दूसरा सांगानेरी गेट हनुमान मंदिर पर हुआ था। इसके बाद बड़ी चौपड़, जोहरी बाजार, छोटी चौपड़ और तीन अन्य स्थानों पर धमाके हुए थे। बम धमाके के बाद राज्य सरकार की सिफारिश पर उच्च न्यायायल ने मामले की सुनवाई के लिए विशेष अदालत गठित की थी।