13 लुटेरे और दहशत के 30 मिनट! खालिस्तानी नारे लगाते वो PNB में घुसे, फिर…

हाथों में बंदूक और तलवार, बदन में खाकी वर्दी… वो 13 लोग जैसे ही बैंक में घुसे (Punjab National Bank Loot) हर कोई सन्न रह गया। एक-एक कर के वो पुलिस की वर्दी पहने गेट से अंदर घुसते चले गए। उनके सामने खड़े लोग डर के मारे उन्हें जगह देते रहे और वो भीड़ के बीच आगे बढ़ते गए। हर किसी को लगा कि शायद बैंक में कुछ बड़ा क्राइम हुआ है, इसलिए इतनी बड़ी संख्या में पुलिसवाले बैंक में आए हैं। हैरान परेशान ग्राहक अपने सामने सबकुछ देख रहे थे और साथ ही बैंक कर्मचारी भी। किसी को कुछ समझ नहीं आया।

पुलिस की खाकी वर्दी में बैंक लूट
तभी खाकी वर्दी पहने इन कर्मचारियों ने बैंक के अंदर ही नारे लगाने शुरू किए। ‘खालिस्तान’ की आवाज से पूरा बैंक गूंजने लगा और बैंक कर्मचारियों समेत ग्राहकों के हाथ-पैर फूलने लगे। खाकी वर्दी पहने बैंक के अंदर घुसे ये कोई पुलिसवाले नहीं, ये खालिस्तानी थे जो बैंक लूटने आए थे। इनका मकसद था देश की सबसे बड़ी लूट को अंजाम देना। इनका मकसद था, अपने संगठन के लिए पैसा जुटाना। इनका मकसद था बैंक लूटकर अपने आतंकी संगठन के लिए हथियार खरीदना।

फरवरी का वो खौफनाक दिन
देश के इतिहास में दर्ज ये खौफनाक वारदात हुई पंजाब के लुधियाना में। 12 फरवरी 1987 का वो दिन सालों बाद भी वहां मौजूद लोगों के जेहन में खौफ भर देता है। लुधियाना में पंजाब नैशनल बैंक की मिलरगंज ब्रांच। सुबह करीब नौ बजे बैंक खुला। ग्राहकों का आना शुरू हो चुका था। बैंक मैनेजर समते तकरीबन सारे कर्मचारी बैंक में पहुंच चुके थे। तभी 9.45 बजे कुछ पुलिसवाले हाथों में हथियार लेकर बैंक के अंदर आते हैं। ‘कोई अपनी जगह से नहीं हिलेगा, अगर कोई हिला तो गोली मार दी जाएगी’… हाथ में बंदूक लिए ये पुलिसवाले लोगों को डराते है।

बैंक में लगे खालिस्तान के नारे
बैंक में अब हर कोई एकदम शांत हो जाता है, लेकिन ये पुलिस की वर्दी पहने लुटेरे बैंक में हथियार लहराकर नारे लगाने लगते हैं। ये बैंककर्मियों को डराते-धमाकते हैं और फिर सीधा कैश रूम में पहुंच जाते हैं। कैश रूम में एक तरफ पुरानी करंसी थी जबकि दूसरी तरफ नए नोट पड़े हुए थे। ये बैंक की पुरानी करंसी को फटाफट बोरियों में भरने लगे। ये सभी एक ट्रक में बैठकर बैंक तक आए थे। इन्होंने फटाफट कैश से भरी बोरियां उसी ट्रक में डाली और फिर नारे लगाते हुए बैंक से फरार हो गए। जितनी देर ये लोग बैंक में रहे लोगों की धड़कनें रुक गई थीं, हर कोई अपनी-अपनी जगह पर मूर्ति बनकर खड़ा था।

5 करोड़ 70 लाख की लूट
उस दिन पंजाब नैशनल बैंक की इस ब्रांच से 5 करोड़ 70 लाख रुपये लूटे जाते हैं। इस पैसे में से कुछ पैसा आरबीआई का भी था जो यहां रखा गया था। इसके अलावा भी बैंक में 10 करोड़ रुपये की एकदम नई करंसी मौजूद थी, लेकिन इन लुटरों ने उस करंसी पर हाथ नहीं लगाया। बैंक में पुलिस की ड्रेस में घुसे ये लुटेरे थे तो हथियारों से लैस, लेकिन बैंक में इन्होंने हत्यारों का इस्तेमाल नहीं किया। न कोई गोली चली और न ही किसी कोई अन्य हथियार लोगों पर चलाया गया। सिर्फ डरा-धमाकर बैंक में ये बड़ी लूट को अंजाम दिया गया।

लाभ सिंह था रॉबरी का मास्टरमाइंड
जरा सोचिए आज से 35 साल 5 करोड़ 70 लाख की क्या अहमियत रही होगी। उस वक्त के हिसाब से इसे देश की सबसे बड़ी लूट माना गया। लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में ये लूट दर्ज हुई। इस लूट को अंजाम दिया था खालिस्तान की मांग कर रहे पंजाब के ही एक गैंग ने। इस रॉबरी का मास्टर माइंड था लाभ सिंह। उन दिनों खालिस्तान की मांग काफी जोरों पर थी और लाभ सिंह भी कुछ सालों पहले ही इस संगठन में शामिल हुआ था।

संगठन के लिए पैसा जुटाना मकसद
लाभ सिंह का असली नाम सुखदेव सिंह ढिल्लो था। सुखदेव पहले पंजाब पुलिस में कॉनस्टेबल था, लेकिन 1983 में उसने पुलिस की नौकरी छोड़ दी और फिर वो खालिस्तानी मूवमेंट के साथ जुड़ गया। जरनैल सिंह भिंडरवाला से प्रभावित सुखदेव सिंह का नाम खालिस्तानी मूवमेंट से जुड़ने के बाद ही बदला गया। उसे भिंडरवाला ने लाभ सिंह नाम दिया। लाभ सिंह को संगठन के लिए पैसा जुटाने का काम दिया गया था और इसी काम के तहत उसने 1987 में इस बैंक को लूटने की साजिश रची।

13 लोगों ने दिया लूट को अंजाम
इस काम के लिए लाभ सिंह ने अपने गैंग के 13 लोगों को चुना जो पीएनबी की मिलर गंज ब्रांच में जाकर पैसा लूटेंगे। बैंक से लूटे गए पैसों का इस्तेमाल खालिस्तानी गैंग के लिए हथियार खरीदने में किया गया। दरअसल ये लोग अपनी पावर बढ़ाने के लिए अपने पास AK-47 राइफल्स जैसे नए-नए मॉडर्न हथियार खरीदते थे जिनकी कीमत काफी ज्यादा होती थी। बैंक लूटकर पैसे जुटाए जाते थे और संगठन को मजबूत किया जाता था।

टाडा कोर्ट में चला था केस
बैंक लूटने के बाद उस वक्त के बैंक मैनेजर एस एन मलहोत्रा ने बैंक लूट का मामला पुलिस में दर्ज करवाया। मैनेजर ने बैंक लूट का पूरा किस्सा पुलिस को बताया और साथ ये भी बताया कि लुटरों ने खुद खालिस्तानी बताया था। पुलिस की छानबीन चलती रही, आरोपी गिरफ्तार भी हुए। कई सालों तक ये केस पंजाब की टाडा कोर्ट में चलता रहा। पुलिस ने बाद में करीब 67 लाख रुपये बरामद भी किए। बरामद किए गए पैसों में ज्यादातर 100-100 रुपये के नोटों की गड्डियां थीं।

सुप्रीम कोर्ट ने किया आरोपियों को बरी
2012 यानी 25 साल बाद में इस मामले में टाडा कोर्ट ने आरोपियों को 10-10 साल की सजा सुनाई। हालांकि बाद ये आरोपी टाडा कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए जहां से इन्हें बरी कर दिया गया। इस डकैती के मास्टर माइंड लाभ सिंह की तो इस घटना के कुछ सालों बाद ही पुलिस एनकाउंटर में पंजाब के होशियारपुर में मौत हो गई थी। इतिहास के पन्नों में दर्ज इस बैंक डकैती का जिक्र आज भी लोगों के अंदर दहशत भर देता है। उस वक्त बैंक में मौजूद लोगों और बैंककर्मियों को वो दहशत भरे चंद मिनट आज भी भूले नहीं भूलते।