इंदौर के मंदिर में स्थापित हैं नेपाल से लाए साढ़े 12 हजार शालिग्राम, रोजाना होती हैं इनकी पूजा

अयोध्या में भगवान श्री राम की जिस पत्थर से मूर्ति निर्मित होगी उसी शालिग्राम पत्थर का इंदौर में भी एक मंदिर मौजूद है. इंदौर के विद्या धाम में सन 2015 में नेपाल की गडंकी नदी से निकले हुए शालिग्राम को लाया गया है. जिनकी संख्या 12500 है और इसे विद्या धाम मंदिर परिसर में ही बने भगवान विष्णु के मंदिर में लगाया गया है. इस मंदिर में भगवान विष्णु के साथ 12500 शालिग्राम मौजूद है. जिनकी रोज पूजा-अर्चना की जाती है, साथ ही जिस तरह से अयोध्या में एक बड़े से शालिग्राम पत्थर के माध्यम से भगवान श्री राम और माता सीता की मूर्ति को बनाया जाएगा उसी के कारण आज एक बार फिर नेपाल की गंडकी नदी अपने शालिग्राम पत्थर के लिए सुर्खियों में बनी हुई है.
वहीं इस शालिग्राम पत्थर की अलग-अलग पौराणिक मान्यता भी है. पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक वृंदा नामक एक महिला से मुलाकात करने के लिए भगवान विष्णु उनके पति का रूप धर कर चले गए थे, लेकिन वृंदा भगवान विष्णु को पहचान गई और उन्होंने भगवान विष्णु को श्राप दे दिया कि आप मेरे पति का रूप धारण कर यहां पर आए हैं और आप इसी वक्त पत्थर के हो जाए. उसी समय भगवान विष्णु वहीं पर पत्थर के हो गए. जिसके बाद वृंदा गंडकी नदी बनकर वही से बहने लग गई और उसके बाद से लगातार गंडकी नदी में ही एकमात्र शालिग्राम पत्थर मिलता है.
शालिग्राम के पत्थर से भगवान राम और सीता की मूर्ति बनाई जाएगी
देश और दुनिया में जहां पर भी शालिग्राम से भगवान स्थापित होते हैं उसी गंडकी नदी में से निकले शालिग्राम के पत्थर से भगवान की मूर्ति निर्मित होती है. नेपाल की नदी से निकले हुए शालिग्राम के पूजनीय होने के कारण उसका बड़ी संख्या में परिवहन हो रहा था. जिसके चलते नेपाल सरकार ने उसके परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन पूजन के लिए एक या दो शालिग्राम अभी भी आसानी से लाया जा सकता है और अयोध्या में जिस तरह से बड़े से शालिग्राम को लाया गया है उसके बाद उस शालिग्राम के पत्थर से भगवान राम और सीता की मूर्ति बनाई जाएगी जिसके कारण एक बार फिर नेपाल की गंडकी नदी में मौजूद शालिग्राम सुर्खियों में बना हुआ है.
2015 में हुई थी मंदिर की स्थापना
पुजारी अश्विन शास्त्री का कहना है कि देशभर में मौजूद इस तरह का यह दूसरा मंदिर है. साथ ही जो शालिग्राम इस मंदिर में मौजूद है. उनकी रोज पूजा भी की जाती है. साथ ही कई लोग दर्शन करने के लिए भी मंदिर में आते हैं, क्योंकि गंडकी नदी में एकमात्र इस तरह का शालिग्राम पत्थर मिलता है जिसके कारण यह काफी पूजनीय है.
साथ ही पुजारी अश्विन शास्त्री का यह भी कहना है कि इस मंदिर की स्थापना 2015 में हुई और नेपाल में मौजूद गंडकी नदी से शालिग्राम को लाया गया है जिनकी जहां पर रोजाना पूजा होती है साथ ही इस मंदिर में भगवान विष्णु भी मौजूद है. उन्हीं के साथ शालिग्राम भी मौजूद है वही इस मंदिर के गर्भ ग्रह में प्रवेश करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को धोती पहनी होती है तभी उसे गर्भ ग्रह में प्रवेश देकर पूजा अर्चना का अधिकार मिलता है.