100 दोषी छूट जाएं लेकिन… जज न्याय बिंदु ने केजरीवाल पर अपने फैसले में क्या-क्या कहा

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक्साइज पॉलिसी केस में जमानत मिल गई। राउज एवेन्यू कोर्ट ने जांच एजेंसी ईडी पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए सीएम केजरीवाल को जमानत दी। हालांकि ईडी ने इस फैसले के अगले दिन हाईकोर्ट का रुख किया, जहां अदालत ने निचली अदालत के फैसले पर स्टे लगा दिया। ऐसे में केजरीवाल की तिहाड़ जेल से रिहाई नहीं हो सकी। हालांकि, राउज एवेन्यू कोर्ट ने किन आधार पर सीएम केजरीवाल को जमानत दी, बताते हैं। दरअसल, ईडी ने अपनी दलील में कहा था कि जांच एक आर्ट है और कभी-कभी एक आरोपी को जमानत और माफी का लॉलीपॉप दिया जाता है और कुछ आश्वासन के साथ प्रेरित किया जाता है कि वे अपराध के पीछे की कहानी बताएं। राउज एवेन्यू कोर्ट की विशेष जज न्याय बिंदु ने ईडी के इस तर्क पर सवाल उठाया।ED पर लगे पक्षपात के आरोपजज न्याय बिंदु ने ईडी की दलील पर कहा, ‘अदालत को इस तर्क पर विचार करने के लिए रुकना होगा कि जांच एक कला है, क्योंकि अगर ऐसा है, तो किसी भी व्यक्ति को कलात्मक रूप से उसके खिलाफ सामग्री प्राप्त करके और कलात्मक रूप से रिकॉर्ड से दोषमुक्त करने वाली सामग्री को हटाकर सलाखों के पीछे रखा जा सकता है। यही परिदृश्य अदालत को जांच एजेंसी के खिलाफ यह अनुमान लगाने के लिए बाध्य करता है कि वह बिना पक्षपात के काम नहीं कर रही है।’जज ने किया बेंजामिन फ्रैंकलिन के कोट का जिक्रकोर्ट ने कहा कि नैचुरल जस्टिस को बरकरार रखने के लिए छानबीन निष्पक्ष होना चाहिए। कोर्ट ने संयुक्त राज्य अमेरिका के संस्थापकों में से एक बेंजामिन फ्रैंकलिन को कोट करते हुए कहा कि 100 दोषी छूट जाएं लेकिन एक निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कोर्ट की ड्यूटी है कि वह दोषी को सजा दे लेकिन यह भी सुनिश्चित करे कि किसी निर्दोष को सजा न हो। कोर्ट ने कहा कि केजरीवाल की ओर से जो कुछ मुद्दे उठाए गए थे उस पर ED का कोई जवाब नहीं था। CBI केस और ECIR के बारे में केजरीवाल की ओर से कई मुद्दे उठाए गए थे जिस पर ED चुप रहा। निचली अदालत ने अपने जमानत आदेश में भी कहा कि इस मामले में सह आरोपी के बयान के आधार पर केजरीवाल के खिलाफ आरोप लगाए गए। कोर्ट ने अभी तक केजरीवाल को समन नहीं किया और यह तथ्य जाहिर है। ईडी के कहने पर उन्हें न्यायिक हिरासत में रखा गया है। ईडी की जांच पर कोर्ट ने उठाए सवालजज न्याय बिंदु ने कहा कि जो लोग अपने पिछले बयानों से मुकर गए हैं, उनके जरिए पूरी सच्चाई सामने नहीं आ सकती। वह मामले के कुछ गवाहों का जिक्र कर रही थीं। उन्होंने कहा कि पूरी सच्चाई का पता रिकॉर्ड में मौजूद उन सबूतों के आधार पर चलेगा जो जांच एजेंसी को कानूनी तरीके से हासिल करने होते हैं। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी ईडी अब तक केजरीवाल को अपराध की आय से जोड़ने के लिए कोई प्रत्यक्ष सबूत देने में विफल रही है। हालांकि, यह संभव हो सकता है कि मुख्यमंत्री के कुछ जानने वाले लोग इसमें शामिल हों।इन वजहों से केजरीवाल को दी जमानत जज ने कहा कि एजेंसी यह स्पष्ट करने में विफल रही है कि वो कैसे निष्कर्ष पर पहुंची कि विनोद चौहान से जुड़ी 1 करोड़ रुपये की राशि अपराध की आय का हिस्सा थी। यह भी स्पष्ट नहीं किया गया कि जांच के दौरान पता लगाई गई 40 करोड़ रुपये की कथित राशि अपराध की आय का हिस्सा कैसे थी। उस राशि के संबंध में, न्यायाधीश ने कहा कि जांच अधिकारी ने अदालत को बताया था कि 100 करोड़ रुपये की कथित राशि में से लगभग 40 करोड़ रुपये का पता लगाया जा चुका है, लेकिन ईडी यह स्पष्ट करने में विफल रही है कि बाकी की राशि का पता लगाने में उसे कितना समय लगेगा। उन्होंने कहा कि इससे यह सवाल उठता है कि क्या दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल को अपने खिलाफ उचित सबूत के बिना तब तक सलाखों के पीछे रहना होगा जब तक कि वे पूरी रशि बरामद नहीं कर ली जाती? ‘ईडी के पास केजरीवाल के खिलाफ सबूत नहीं’कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि ईडी का भी मानना है कि रिकॉर्ड में मौजूद सबूत याचिकाकर्ता के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। वह किसी भी तरीके से उसी को प्राप्त करने के लिए समय ले रही है। जांच एजेंसी को निष्पक्ष होना चाहिए ताकि यह माना जा सके कि एजेंसी की ओर से प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का भी पालन किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि केजरीवाल की ओर से उठाए गए कुछ मुद्दों पर ईडी चुप रही, जिसमें उनका यह बयान भी शामिल है कि उनका नाम न तो सीबीआई मामले में है और न ही ईसीआईआर (ईडी की प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट) में है।ईडी डायरेक्ट एविडेंस पेश करने में विफल: कोर्टकोर्ट ने कहा कि ED इस मामले में केजरीवाल के खिलाफ डायरेक्ट एविडेंस पेश करने में विफल रही है। अपराध की निरंतरता के बारे में ED केजरीवाल के खिलाफ सीधा सबूत पेश नहीं कर पाई है। कोर्ट ने कहा कि न्याय होने के साथ-साथ न्याय होते दिखना भी जरूरी है। दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट स्थित जज न्याय बिंदु ने अपने फैसले में कहा कि ED ने जो सबूत पेश किए हैं उसमें केजरीवाल के खिलाफ अपराध की निरंतरता के बारे में सीधा ठोस सबूत नहीं दिखता है। कोर्ट ने जमानत आदेश में कहा कि ED ने अपराध की निरंतरता (प्रोसिड ऑफ क्राइम) के तहत कहा कि गोवा चुनाव में इसका इस्तेमाल हुआ है लेकिन इसको लेकर ED खुद चुप है और फंड के बड़े हिस्से को अभी तलाश नहीं कर पाई है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ED के मुताबिक उसके पास जुलाई 2022 में केजरीवाल के खिलाफ मटीरियल था लेकिन केजरीवाल को अगस्त 2023 में पूछताछ के लिए बुलाया गया। इस बावत ED पर जो सवाल याचिकाकर्ता ने उठाया उसका जवाब ED के पास नहीं है। और इस तरह मामले में ईडी की दुर्भावना दिखती है।राउज एवेन्यू कोर्ट ने कहा कि ED ने ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया जिससे यह पता चले कि सह आरोपी विजय नायर ने केजरीवाल के कहने पर काम किया है। ED इस बात को भी साबित करने में विफल रही है कि विनोद चौहान और चरणप्रीत सिंह के बीच नजदीकी है। ED इस बात को भी साबित करने में विफल रही है कि कैसे इस बात के निष्कर्ष पर पहुंची कि एक करोड़ रुपये जो विनोद चौहान से संबंधित है वह इस अपराध से जुड़ा हुआ है। अपराध की निरंतरता में यह भी साबित नहीं हो रहा है कि कैसे 40 करोड़ रुपये खोजे गए। कोर्ट ने कहा कि न्याय होने के साथ-साथ न्याय होते दिखना भी जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का भी जिक्रकोर्ट ने कहा कि पहली नजर में जो तथ्य हैं उसके आधार पर कहा जा सकता है कि अभी तक केजरीवाल के खिलाफ अपराध साबित नहीं होता है और ऐसे में जमानत दी जाती है। सुप्रीम कोर्ट के 10 मई, 2024 के अंतरिम जमानत आदेश का हवाला देते हुए, अदालत ने याद दिलाया कि पीठ ने कहा था कि यद्यपि गंभीर आरोप लगाए गए हैं, केजरीवाल को दोषी नहीं ठहराया गया है और उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वह समाज के लिए भी खतरा नहीं थे, यह देखते हुए कि मामले में जांच अगस्त 2022 से लंबित थी।